देखना-सोचना-करना यानिकि हर तरह के ग्राहक की ज़रूरत (इंटेंट) को समझना और क्या मेरी पूरी मार्केटिंग का ध्यान कन्वर्ज़न (ग्राहक में बदलने) और बिक्री पर ही होना चाहिए? ग्राहकों की तीन तरह की ज़रूरतें (इंटेंट) क्या-क्या हैं? मैं हर तरह की ज़रूरत (इंटेंट) के हिसाब से अपनी मार्केटिंग किस तरह ऑप्टिमाइज़ करूं?
इशान को एक परेशानी आ रही है। वह अपनी जींस को लेकर नाखुश हैं। (हमने कभी यह दावा नहीं किया कि यह एक बड़ी परेशानी है।) इशान को पूरी तरह नहीं पता कि उन्हें अपनी मौजूदा जींस क्यों पसंद नहीं हैं – हो सकता है वह बहुत तंग हो, बहुत चौड़ी हो, बहुत ही फ़ॉर्मल हो या बहुत ही कैजुअल हो? कम शब्दों में कहें, तो वह अभी नई जींस खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं।।।लेकिन कुछ विकल्प ज़रूर देखना चाहते हैं।
एक दिन इशान को एक स्टाइल ब्लॉग पढ़ते हुए जींस का विज्ञापन दिखाई देता है जिसे देखकर वह उसकी रीटेल वेबसाइट देखने का मन बना लेते हैं। चलिए, हम अंदाज़ा लगाते हैं कि किस तरह का विज्ञापन किसी ऐसे व्यक्ति को लुभा सकता है जिसे अभी खरीदारी नहीं करनी है। इशान की तरह, हर ग्राहक खरीदारी के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, आपकी मार्केटिंग को ऐसे कई लोगों तक पहुंचने की ज़रूरत है जिनकी अलग-अलग ज़रूरतें (इंटेंट) हैं।
अच्छी बात है कि आप अपनी डिजिटल मार्केटिंग को अपने ग्राहक की ज़रूरत (इंटेंट) के मुताबिक ढाल सकते हैं। इससे मौजूदा और आने वाले ग्राहकों को तीन अलग-अलग तरह की ज़रूरतों (इंटेंट) के हिसाब से बाँटने में मदद मिलती है, जिसे हम ‘देखना-सोचना-करना’ कहेंगे।‘देखना’ श्रेणी में सबसे बड़ा और सबसे ज़्यादा ग्राहक वर्ग आता है। ये लोग आपके मौजूदा ग्राहकों से मिलते-जुलते होते हैं, बस यह हो सकता है कि वे अभी आपका सामान या सेवा खरीदने के लिए बाज़ार में न हों और न ही उन्हें आपके ब्रैंड की जानकारी हो। आप उनका ध्यान खींचना चाहते हैं।
‘सोचना’ में वे लोग शामिल होते हैं जो आपके सामान या सेवा जैसा ही कुछ खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन वे अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। आप चाहते हैं कि वे आपके ब्रैंड की अहमियत और उससे मिलने वाले फ़ायदे के बारे में सोचें। जो लोग ‘करना’ श्रेणी में आते हैं, वे खरीदने का फ़ैसला करने के बिल्कुल करीब होते हैं। आप चाहते हैं कि वे आपका ब्रैंड चुनें और आप यह पक्का करना चाहते हैं कि वे जो करने आए हैं, उसे आसानी से कर सकें: अभी खरीदें।
चलिए, हम इन तीनों स्थितियों के बारे में ज़्यादा जानने के लिए यह देखते हैं कि ‘अपना बाज़ार’ वालों ने किस तरह एक ही मोबाइल ऐप्लिकेशन के ज़रिए तीनों स्थितियों के लिए मार्केटिंग की है। ‘अपना बाज़ार’ के फ़ोटो ऐप्लिकेशन की मदद से लोग अपने फ़ोन से ली गई तस्वीरों को यहां ला करके उनमें बदलाव कर सकते हैं। इसके बाद वे प्रिंट करने के लिए ऑर्डर कर सकते हैं – या फिर वे फ़ोटो को शर्ट या मग जैसे सामान पर प्रिंट करवा सकते हैं – और उन्हें अपने स्थानीय ‘अपना बाज़ार’ से ले सकते हैं।
यह रणनीति एक साथ तीनों ज़रूरतों (इंटेंट) तक कैसे पहुंचेगी?
1। देखना: ऐप्लिकेशन ने हर उस व्यक्ति को लुभाया जिसे अपने फ़ोन पर फ़ोटो लेना अच्छा लगता है।
2। सोचना: लोग अपनी फ़ोटो में बदलाव कर सकते हैं और उन्हें प्रिंट करवाने के बारे में सोच सकते हैं।
3। करना: ऐप्लिकेशन की मदद से प्रिंट और फ़ोटो से जुड़े दूसरे सामान ऑर्डर करना और खरीदना आसान हो गया।
‘अपना बाजा़र’ की तरह ही आपको तीनों तरह के ग्राहकों की ज़रूरतों (इंटेंट) को रणनीति बनाकर टारगेट करना चाहिए। चलिए, कुछ बुनियादी बातों के बारे में जानते हैं जिनके ज़रिए आप अपनी मार्केटिंग और विज्ञापन को – साथ ही, अपनी वेबसाइट, मोबाइल साइट और ऐप्लिकेशन की सामग्री को – ‘देखना-सोचना-करना’ श्रेणी के लिए ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं।‘देखना’ श्रेणी के लिए, आपको अपने ब्रैंड को नए ग्राहकों तक ले जाने पर ध्यान देना चाहिए और आपके बारे में जानने में उनकी मदद करनी चाहिए।
आपके विज्ञापन का फ़ोकस ब्रैंडिंग और जागरूकता पर होना ज़रूरी है। साथ ही, यह पक्का करें कि आप अपने ‘देखना’ श्रेणी ग्राहकों को असरदार तरीके से टारगेट कर रहे हैं। इसके लिए आप उनकी देखी जाने वाली वेबसाइटों, जिस सामग्री से वे जुड़ते हैं और जिस तरह की खोजें वे कर रहे हैं, उन पर नज़र रखते हैं। आपकी वेबसाइट, मोबाइल साइट, और ऐप्लिकेशन पर मौजूद सामग्री में आपकी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल के लिए “फ़ॉलो करें” बटन होने चाहिए। लेकिन अभी भी अपनी सामग्री के साथ उनका इंटरैक्शन पाने की फ़िक्र न करें। आपकी साइटों और सोशल प्रोफ़ाइलों पर ग्राहकों का आना यह साबित करता है कि उनके बीच आपके ब्रैंड के लिए जागरूकता है।
इन मेट्रिक, विज्ञापन देखे जाने, सोशल मीडिया गतिविधि (शेयर, लाइक, पसंदीदा, टिप्पणियों, फ़ॉलोअर की संख्या), और अपनी साइट पर आने वाले नए लोगों पर ध्यान दें। सोचना श्रेणी के लिए, अपने टारगेट ग्राहकों पर ध्यान दें और वे आपके ब्रैंड पर विचार करें, इसके लिए कड़ी मेहनत करें।
आपका विज्ञापन ऐसा होना चाहिए जो दर्शकों को आपके ब्रैंड की अहमियत और फ़ायदों के बारे में समझाए। लंबे समय तक बनी रहने वाली दिलचस्पी हासिल करना ज़रूरी है, जैसे कि सोशल मीडिया पर फ़ॉलो करें या ईमेल साइन अप करें। साथ ही, ऐसी साइटों पर विज्ञापन चलाएं जो आपके दर्शकों की पसंद के मुताबिक हैं।
आपकी साइट और ऐप्लिकेशन की सामग्री से आपके ग्राहकों को आपके सामान या सेवा के बारे में अप टू डेट रहने में मदद मिलनी चाहिए। उदाहरण के लिए, कोई सेल होने पर या सामान उपलब्ध होने पर आप उन्हें सूचना पाने के लिए साइन अप करवा सकते हैं या एक “इच्छा सूची में जोड़ें” बटन भी रख सकते हैं। इन मेट्रिक पर नज़र रखनी है : आपके विज्ञापनों की क्लिक-थ्रू दरें, साइट बाउंस दरें (क्या लोग आते हैं और जल्दी ही लौट जाते हैं), और असिस्ट के प्रतिशत (बिक्री ऐसे व्यक्ति से होती है जो आपका विज्ञापन देखता है, आपकी साइट पर आता है और बाद में खरीदने के इरादे से वापस लौट जाता है)।
खास तौर से सामग्री के लिए बने मेट्रिक हैं : न्यूज़लेटर साइनअप, ईमेल सूचना के लिए साइनअप, इच्छा सूची में जोड़े गए सामान, किसी सामान के ईमेल शेयर, और कितनी सामान समीक्षाएं पढ़ी गईं। इन्हें अक्सर माइक्रो-आउटकम कहा जाता है। अब ‘करना’ श्रेणी के लिए। कहने की ज़रूरत नहीं है कि यह स्थिति पूरी तरह कन्वर्ज़न (ग्राहक में बदलने) के बारे में है। आपके विज्ञापन ऐसा होना चाहिए जो बिक्री को कॉल-टू-एक्शन (अब उस ‘अभी खरीदें’ बटन को दबाने का समय है) तक और खास विशेषता वाले सामान और उनके फ़ायदों तक ले जाए। ‘फिर से मार्केटिंग करना’ (उन लोगों को विज्ञापन दिखाना जिन्होंने दूसरी साइटों पर होने के दौरान आपकी साइट देखी है) भी ‘करना’ की स्मार्ट रणनीति है।
आपकी सामग्री की मदद से ग्राहकों के लिए खरीदारी की प्रक्रिया में तेज़ी आनी चाहिए। “कार्ट में जोड़ें” बटन को मिलना आसान बनाएं, मेहमान के तौर पर चेकआउट करने की सुविधा दें, और लोगों के लिए खरीदारी करने से पहले डाली जाने वाली ज़रूरी जानकारी की मात्रा कम से कम रखें। कन्वर्ज़न दर, कितने लोग खरीदारी किए बिना ही अपनी कार्ट छोड़ देते हैं और आमदनी, ये ऐसे मेट्रिक हैं जिन पर नज़र रखी जानी चाहिए।
अब आपने ‘देखना-सोचना-करना’ के लिए अपने विज्ञापन और सामग्री को तैयार करने का तरीका जान लिया है, तो चलिए, किसी एक तरह के ग्राहक की ज़रूरत (इंटेंट) के लिए सैंपल विज्ञापन बनाते हैं।
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