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Measure Track and Test Your Marketing Success

अपनी मार्केटिंग सफलता का माप, ट्रैक और परीक्षण करें। डिजिटल मेट्रिक की मदद से लोगों से अपने जुड़ाव को ट्रैक करें। डिजिटल मेट्रिक्स से ग्राहक का व्यवहार ट्रैक करें। ट्रैकिंग ऐंड Analytics शुरू करें। मार्केटिंग से आपके कारोबार के लक्ष्य कितने पूरे हुए हैं, यह डिजिटल मेट्रिक का इस्तेमाल करके ट्रैक करें। लोगों से जुड़ाव का क्या मतलब है? अलग-अलग मार्केटिंग चैनलों पर लोगों से जुड़ाव मापने के लिए मुझे कौनसे मेट्रिक का इस्तेमाल करना चाहिए? लोगों से बेहतर रूप से जुड़ने के लिए क्या करना चाहिए? फ़ायदेमंद इंटरैक्शन के बारे में जानकारी इकट्ठी करके अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मुझे मदद कैसे मिल सकती है? मैं ग्राहक के व्यवहार से जुड़े लक्ष्य कैसे तय करूं? मेरे किराये पर लिए गए और मालिकाना हक वाले चैनलों के लिए व्यवहार से जुड़े मेट्रिक्स कौनसे हैं? मैक्रो और माइक्रो लक्ष्य क्या होते हैं? मुझे मेरी वेबसाइट के लिए मेरे कारोबार पर मैक्रो और माइक्रो लक्ष्य की किन मेट्रिक को ट्रैक करना चाहिए? मुझे सोशल मीडिया पर किन मेट्रिक को ट्रैक करना चाहिए? मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा SEM कैंपेन काम कर रहा है या नहीं? SEM के तीनसामान्य लक्ष्य क्या हैं? उन लक्ष्यों को ट्रैक करने के लिए मुझे कौनसे मेट्रिक का इस्तेमाल करना चाहिए?


“क्या डिजिटल मार्केटिंग के लिए की जा रही मेरी मेहनत वाकई रंग ला रही है?” शायद आप उन कुछ लोगों में से हों, जिन्होंने आज तक यह सवाल नहीं पूछा। लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए यह बहुत आम सवाल है। जवाब जानने के लिए, आपको ट्रैक करना चाहिए कि किसी ग्राहक के आपके ब्रैंड के साथ जुड़ने से लेकर आपका प्रॉडक्ट खरीदने या आपकी सेवा लेने तक के सफ़र में आपकी डिजिटल मार्केटिंग की क्या भूमिका रहती है। इस सफ़र में शामिल है, लोगों से जुड़ना, उनका व्यवहारऔर उसका नतीजा। हम इस सफ़र के पहले पड़ाव यानी लोगों से जुड़ने पर नज़र डालेंगे। शायद आप जानते होंगे कि लोगों से जुड़ाव, नए ग्राहक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अनोखा शब्द है। लेकिन इसमें ग्राहक बनाने के अलावा भी बहुत कुछ होता है। जब बात आपकी डिजिटल मार्केटिंग की सफलता मापने की हो, तब लोगों से जुड़ाव को सही तरह से समझना ज़रूरी होता है।


यह मापने के लिए कि आपकी डिजिटल मार्केटिंग कैसा काम कर रही है, आपको दोनों तरह के चैनलों से लोगों के जुड़ाव को ट्रैक करना चाहिए: वे चैनल जिनके आप मालिक हैं और किराए पर लिए गए चैनल भी। जिन चैनल के आप मालिक होते हैं, उन्हें आप पूरी तरह से नियंत्रित करते हैं, जैसे आपकी वेबसाइट (इसमें आपकी मोबाइल साइट भी शामिल है)। किराए पर लिए गए चैनल वे चैनल होते हैं, जिन्हें आप अपनी पसंद के मुताबिक बना सकते हैं और उन पर सामग्री पोस्ट कर सकते हैं, लेकिन वे YouTube या Twitter जैसे बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क का हिस्सा होते हैं। Google Analytics और Adobe Analytics जैसे टूल यह पता करने में आपकी मदद कर सकते हैं कि आपको किराए पर लिए गए और अपने चैनल पर कितनी अच्छी क्वालिटी का ट्रैफ़िक मिल रहा है। लेकिन पहले यह जानना ज़रूरी है कि किस चैनल के लिए किस तरह की मेट्रिक मायने रखती है। चलिए, एक ऐसा गेम खेलते हैं जिसमें आपको सिर्फ़ अंदाज़ा लगाना है।


मालिकाना हक वाले चैनल के लिए, आपको इन मेट्रिक पर नज़र डालनी चाहिए: क्लिक और असिस्ट। क्लिक मेट्रिक के ज़रिए आप देख सकते हैं कि आपके ऑनलाइन विज्ञापन के साथ कितने लोग जुड़ते हैं और फिर आपकी वेबसाइट पर जाते हैं. इससे आपको पता चलेगा कि आपके विज्ञापन के ज़रिए आपकी साइट पर आकर लोग आपके ग्राहक बन रहे हैं या नहीं। सहायता (असिस्ट) मेट्रिक में डिजिटल मार्केटिंग के ज़रिए पहली बार में कोई बिक्री नहीं होती, लेकिन ये इतने असरदार होते हैं कि ग्राहक बाद में आकर आपकी साइट से खरीदारी करते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए ग्राहक नेहा आपका सर्च विज्ञापन देखती है और उस पर क्लिक करके आपकी साइट पर जाती हैं, लेकिन बिना कुछ खरीदे वहां से चली जाती हैं। एक हफ़्ते बाद भी आपके प्रॉडक्ट अभी भी उनके दिमाग में रहते है, इसलिए वह वापस आती हैं और कुछ खरीदती हैं। इसका मतलब है कि आपके मूल सर्च विज्ञापन ने उस बिक्री में मदद की।


इस तरह लोगों के जाने के बाद वापस आकर कुछ खरीदने के लिए ज़रूरी है कि आपके विज्ञापन और साइट बहुत आकर्षक हों. इसी वजह से “विज्ञापन पर क्लिक करके साइट पर जाकर तुरंत कुछ खरीदने” वाली मेट्रिक के बजाय असिस्ट मेट्रिक से आपकी मार्केटिंग के नए ग्राहक बनाने के बारे में ज़्यादा जाना जा सकता है। आप Google Analytics और KISSmetrics जैसे टूल से अपने सहायता (असिस्ट) प्रतिशत को ट्रैक कर सकते हैं. सहायता (असिस्ट) के आंकड़े आमतौर पर “एक से ज़्यादा चैनल वाले फ़नल” या “फ़नल” के तहत पाए जाते हैं।चलिए, अब किराए वाले चैनलों पर नज़र डालते हैं। उनके लिए आपको इंप्रेशन, क्लिक-थ्रू दर, और शेयर की संख्या को ट्रैक करना चाहिए। इंप्रेशन आपको बताते हैं कि कितने लोगों ने आपकी सामग्री देखी। उदाहरण के लिए, ग्राहक नेहा की एक इंप्रेशन के रूप में गिनती तब की जाती है, जब वह किराए वाले चैनल पर आपका पोस्ट या विज्ञापन देखती हैं। क्लिक-थ्रू दर इससे एक कदम आगे जाती है और आपको दिखाती है कि कितने लोग उस पोस्ट या विज्ञापन पर क्लिक और/या उस पर कोई कार्रवाई करना चाहते थे। शेयरतब होते हैं जब लोगों को आपकी सामग्री इतनी दिलचस्प, मनोरंजक और/या अपने जीवन से इतनी जुड़ी हुई लगती है कि वे उसे अपने सोशल नेटवर्क पर दिखाना चाहते हैं। उन सभी मेट्रिक को ट्रैक करते समय, उन तरीकों के बारे में भी सोचें, जिनसे आपकी वेबसाइट या सोशल मीडिया, ‘नए ग्राहक’ हासिल करने में आपकी मदद कर सकते हैं।


अपने प्रॉडक्ट से जुड़ी ऐसी किसी रुचि या गतिविधि के बारे में सोचें, जो आपके ग्राहकों को पसंद है। इससे आपके पास आपके किराए वाले और मालिकाना हक वाले चैनलों के लिए ‘लोगों से जुड़ने के बारे में बेहतर मार्केटिंग आइडिया आ सकते हैं। डिजिटल दुनिया के बारे में सबसे अच्छी चीज़ों में से एक है वह डेटा जो हर समय आपके लिए उपलब्ध होता है। इससे यह ट्रैक करना आसान हो जाता है कि आपकी मार्केटिंग काम कर रही है या नहीं। यह पता करना थोड़ा मुश्किल है कि क्या ट्रैक करना है। आप यह पता लगा सकते हैं कि आपको कितने ग्राहक मिल रहे हैं (प्राप्ति) और आखिर में आप उनसे क्या करवाना चाहते हैं (नतीजा), लेकिन इन दोनों कामों के बीच के पड़ाव को न भूलें। इसका मतलब है कि जब ग्राहक आपकी वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनल पर आते हैं, तब उनकी दिलचस्पी किन चीज़ों में होती है? आप यह पक्का करना चाहते हैं कि आपकी डिजिटल मार्केटिंग से लोगों में दिलचस्पी पैदा होती है, जिसकी वजह से लोग आपकी साइट पर आना पसंद करते हैं। सवाल यह है कि साइट पर लोगों के इस तरह से वापस आने की प्रक्रिया किस तरह होती है?


सबसे पहले आपको यह पता लगाना चाहिए कि ग्राहकों के किस तरह के व्यवहार से आपके कारोबार को फ़ायदा मिलता है। एक अच्छी शुरुआत के लिए, सबसे पहले इस बारे में ज़रूर सोचें कि लोगों के आपकी वेबसाइट, ऐप्लिकेशन, और सोशल मीडिया चैनलों पर आने पर आप उनसे कैसी प्रतिक्रिया चाहते हैं। इन बातों पर ध्यान दें: लोगों को किन पेज पर जाना चाहिए? क्या उन्हें एक से ज़्यादा बार वापस आना चाहिए? लोगों को किस तरह के वीडियो या सामग्री को देखना और शेयर करना चाहिए? जब आपको पक्का पता चल जाता है कि किस तरह के व्यवहार ज़रूरी हैं, तब आप उन्हें ट्रैक करना शुरू कर सकते हैं। Google Analytics, WebTrends या Adobe Analytics जैसे टूल मालिकाना हकवाले चैनलों (जिन पर आपका नियंत्रण हो जैसे कि आपकी वेबसाइट) और किराये पर लिए गए चैनलों (जिन पर आप सोशल मीडिया की तरह सिर्फ़ पोस्ट कर सकते हैं और उन्हें अपनी पसंद के मुताबिक बनाते हैं) पर व्यवहार से जुड़े मेट्रिक्स को ट्रैक करने में आपकी मदद कर सकते हैं। हम दोनों तरह के चैनलों के लिए अलग-अलग मेट्रिक्स देखने वाले हैं और देखते हैं कि वे आपके डिजिटल मार्केटिंग के बारे में आपसे क्या कहते हैं। हम मालिकाना हक वाली चीज़ों जैसे कि आपकी वेबसाइट (जिसमें कि मोबाइल साइट भी शामिल है) से शुरू करेंगे।


अपनी डेस्कटॉप वेबसाइट के लिए, आपको बाउंस दर और वेबसाइट पर आने वाले लोगों की लॉयल्टी ट्रैक करनी चाहिए। कहीं आप यह तो नहीं समझ रहे कि बाउंस दर से हमारा मतलब कोई बॉलउछालने से है? ऐसा नहीं है, इसका मतलब है कि कितने प्रतिशत लोग आपकी वेबसाइट पर आते तो हैं लेकिन बिना कुछ किए चले जाते हैं। आप ऐसे लोगों के प्रतिशत का औसत भी निकाल सकते हैं, जो सिर्फ़ एक ही पेज देखते हैं (जैसे कि आपका लैंडिंग पेज)। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि अंकिता गलती से आपके विज्ञापन पर क्लिक करके आपकी साइट पर आ गई हों और आते ही उन्होंने बिना कुछ किए वापस जाने का बटन क्लिक कर दिया हो, या विंडो शॉपिंग की शौक़ीन सुप्रिया ने शायद सिर्फ़ आपका होमपेज देखा हो, लेकिन उसने आपकी साइट पर कुछ और न देखा हो। बाउंस दर कम होना अच्छी बात है, क्योंकि इससे आपको यह पता चल जाता है कि कौनसे लोग आपकी साइट पर देर तक रुक रहे हैं। लेकिन यह इसलिए भी अच्छा है क्योंकि इसका मतलब है कि लोगों ने जिस उम्मीद के साथ आपके विज्ञापन या खोज नतीजे पर क्लिक किया, वह आपकी वेबसाइट के ज़रिए पूरी हो रही है। साइट पर आने वाले लोगों की लॉयल्टी से आपको यह पता चलता है कि कोई व्यक्ति आपकी साइट पर अक्सर कितनी बार वापस आता है। इसे मापने के लिए इसके लिए एक लक्ष्य तय करें कि आप एक तय समय में लोगों को आपकी साइट पर कितनी बार वापस आते हुए देखना चाहते हैं।


मान लीजिए कि आप एक रिसर्च से पाते हैं कि अगर लोग एक महीने में आपकी साइट पर पाँच बार से ज़्यादा आते हैं तो ज़्यादातर मामलों में वे आपके लंबे समय के लिए सच्चे ग्राहक बन जाते हैं। तो आपको यह लक्ष्य ट्रैक करना चाहिए: कितने लोग 30 दिनों में वापस पाँच बार साइट पर आते हैं। आपकी मोबाइल साइट के लिए, बाउंस दर के साथ-साथ यह भी ट्रैक करना चाहिए कि लोग आपकी साइट पर कितना समय बिताते हैं। बाउंस दर, मोबाइल साइट के लिए बहुत ही ज़रूरी मेट्रिक्स होता है। ज्यादातर मोबाइल डिवाइस और वेब ब्राउज़र पर ‘वापस जाएं’ बटन दबाकर लोगों के लिए साइट को छोड़ना काफ़ी आसान होता है। ऐसा करने में उन्हें एक सेकंड का समय भी नहीं लगता। आमतौर पर बहुत ज्यादा या खराब बाउंस दर का मतलब है कि आपकी साइट मोबाइल पर चलने के लिए नहीं बनाए गयी है। अगर कोई मोबाइल साइट आसानी से नेविगेट न हो पाए और वह लोड होने में ज्यादा समय ले,तो ये आपकी साइट से लोगों के जल्दी बाउंस करने के बड़े कारण हैं।


आपकी साइट मोबाइल के लिए बनी है या नहीं, इस बात का लोगों के आपकी साइट पर बिताए गए समय पर भी फ़र्क पड़ता है। अगर उनका अनुभव कठिन और पेचीदा रहता है, तो वे इस पर विचार करने में ज़्यादा समय बर्बाद नहीं करेंगे। लोग आपकी साइट पर कितना समय बिताते हैं इससे आपको यह पता चल जाएगा कि आपको अपनी मोबाइल साइट में कुछ बदलाव करने की ज़रूरत तो नहीं है। डिजिटल मार्केटिंग के बारे में पूरी जानकारी के लिए, आपको किराए के चैनलों पर भी व्यवहार को ट्रैक करना चाहिए। इसमें YouTube और “स्ट्रीम के हिसाब से चलने वाले” सोशल मीडिया शामिल हैं (जब फ़ीड के ज़रिए पोस्ट तेज़ी से आगे बढ़ते हैं, जैसे कि स्टेटस अपडेट या ट्वीट)।
व्यवहार से जुड़े मेट्रिक्स को ट्रैक करना शुरूकरने के लिए, आइए एक अच्छे तरीके का पता लगाएं. मदद के लिए, अपने मार्केटिंग चैनल से जुड़े ऐसे किसी भी विकल्प पर टैप करें जिसपर आपको शक हो।


मार्केटिंग से आपके कारोबार के लक्ष्य कितने पूरे हुए हैं, यह डिजिटल मेट्रिक का इस्तेमाल करके ट्रैक करें। मान लें कि आपके कारोबार के लिए घर-घर जाकर चीज़ें बेचने वाले दो लोग हैं: मैक्रो और माइक्रो। अजीब सा नाम होने के साथ-साथ, उन दोनों के बेचनेय का तरीका बिल्कुल अलग है। मैक्रो चीज़ों को फटाफट बेचता है। किसी ग्राहक के दरवाज़े पर कदम रखते ही वह उसे उत्पाद खरीदने के लिए राज़ी करने का कोशिश करता रहता है। माइक्रो अक्सर ऐसे लोगों से मिलता रहता है, जो उसके ग्राहक बन सकते हैं। वह कभी भी उनके पीछे नहीं पड़ता। हो सकता है कि वह तुरंत बिक्री न करें, लेकिन जब कभी वह लोगों से मिलता है, वे उसे बिना किसी झिझक के बुलाते हैं। आखिर में, वे उससे उत्पाद खरीदने लगते हैं। आप जानते हैं कि मैक्रो और माइक्रो दोनों आपके कारोबार के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन आपको यह पता लगाना होगा कि लंबे समय में इनमें से कौन ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा।


दरअसल, मैक्रो और माइक्रो डिजिटल मार्केटिंग के अलग-अलग तरह के लक्ष्य हैं। मैक्रो लक्ष्य कुछ समय में होने वाले फ़ायदों और अपने कारोबार के मुख्य लक्ष्य (जैसे बिक्री बढ़ाना) तक पहुंचने के बारे में है। माइक्रो लक्ष्य कारोबार को लंबे समय तक बनाए रखने के बारे में (जैसे ब्रैंड जागरूकता और लोगों के दिमाग में बने रहना) है। वे आने वाले समय में आपके कारोबार के मुख्य लक्ष्य पाने में मदद करते हैं और आपके कारोबार को उन लोगों के साथ जोड़ने के बारे में है, जिन्हें आपके व्यवसाय में फ़िलहाल दिलचस्पी है, लेकिन अभी वे उसे खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं। सिर्फ़ मैक्रो लक्ष्यों पर ध्यान देना आकर्षक लग सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि शायद माइक्रो आपके कारोबार के लिए ज़्यादा ज़रूरी हो। दोनों के आंकड़े देखकर आप जान पाएंगे कि क्या अलग-अलग तरह के ग्राहकों के बीच आपकी डिजिटल मार्केटिंग सफल है। दोनों तरह के लक्ष्यों के बारे में जानने के लिए, आपको पता होना चाहिए कि अपने सभी मार्केटिंग चैनल के लिए आपको किन मेट्रिक को ट्रैक करना चाहिए। चलिए, आपके मालिकाना हक वाले चैनलों से शुरू करते हैं, यानी आपकी डेस्कटॉप और मोबाइल वेबसाइटें, जिन्हें आप पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं।


आपकी मोबाइल वेबसाइट के लिए, आप मैक्रो मेट्रिक को छोड़कर केवल माइक्रो को देख सकते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आज के समय में में मोबाइल का इस्तेमाल ग्राहकों को खरीदारी के लिए कहने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए होता है, ताकि वे इसे आसानी से और बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर पाएं। एक बुरे डिज़ाइन वाली और पूरी तरह बेकार मोबाइल साइट होने पर शायद लोग तुरंत साइट छोड़कर चले जाएंगे और कभी लौटकर नहीं आएंगे। डेस्कटॉप वेबसाइट के लिए, आपको अपने कम समय में पूरे होने वाले और लंबे समय में पूरे होने वाले दोनों कारोबारी लक्ष्यों के लिए अलग-अलग मेट्रिक देखनी चाहिए। आपके कारोबार के मुख्य लक्ष्य या मैक्रो लक्ष्य जानने के लिए मेट्रिक है कन्वर्ज़न या नए ग्राहक बनने के आंकड़े। सामान्य रूप से इसका मतलब है, बिक्री, लेकिन आपके दूसरे लक्ष्य भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप बिक्री के बजाय, शायद उन ग्राहकों को पहचानना चाहें, जिन्हें आपके उत्पाद या सेवा में दिलचस्पी हो सकती है। इससे यह ट्रैक हो पाएगा कि आपकी वेबसाइट पर आकर कितने लोग न्यूज़लेटर के लिए साइनअप कर रहे हैं।


चाहे आपका लक्ष्य कुछ भी हो, उसे एक तय किए गए समय में ट्रैक करें और देखें कि क्या आपकी वेबसाइट उसे पूरा कर रही है। अगर नहीं, तो साइट में कुछ सुधार करने का समय आ गया है। अपने कारोबार के माइक्रो लक्ष्यों के बारे में जानने के लिए, आप एक से ज़्यादा बार देखे जाने वाले पेज और बनाए गए खातों की संख्या के प्रतिशत का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपको पता चल सकता है कि क्या आपकी वेबसाइट को लोग आसानी से इस्तेमाल कर पाते हैं और क्या वह दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाती है, त्ाकि दर्शक आपकी कंपनी से आगे भी जुड़े रहें — जिसका मतलब है कि वे जीवन भर के लिए ग्राहक और प्रशंसक बन सकते हैं। कभी-कभी आप अपने मैक्रो लक्ष्य पाने के लिए माइक्रो लक्ष्यों का इस्तेमाल कर सकते हैं।


चलिए, जानते हैं कि पसंद के मुताबिक बनाए जा सकने वाले ब्लॉग का प्लैटफ़ॉर्म देने वाली एक कंपनी, Ghost ने ऐसा करने के लिए अपने मालिकाना हक वाले चैनल का इस्तेमाल किस तरह किया। Ghost ने नए ग्राहकों को अपनी सेवाएं 14 दिन के लिए मुफ़्त इस्तेमाल करने की सुविधा दी। उनके कारोबार का मुख्य लक्ष्य (यानी मैक्रो लक्ष्य) था, मुफ़्त सुविधा के बाद ज़्यादा से ज़्यादा लोग पैसे देकर उनके GhostPro प्लैटफ़ॉर्म में अपग्रेड करें। उन्हें पता चला कि उनके पहली पोस्ट बनाने, कस्टम ब्लॉग थीम इस्तेमाल करने या उनके ब्लॉग के लिए कोई खास डोमेन नाम जोड़ने के बाद कई लोगों ने अपग्रेड किया। इसलिए उन्होंने 3 कार्रवाइयों वाले माइक्रो लक्ष्य बनाए। इन माइक्रो लक्ष्यों तक पहुंचने (और उससे सदस्य बनाने का मैक्रो लक्ष्य) के लिए, उन्होंने “ब्लॉग सेटअप” में बढ़त को मापने के लिए एक मीटर बनाया। इस विज़ुअल ने लोगों को सभी 3 कार्रवाइयां करने के लिए प्रोत्साहित किया। अगर कोई माइक्रो लक्ष्य पूरा किए बिना Ghost की साइट छोड़ देता है, तो उन्हें 90-सेकंड के वीडियो वाला एक ईमेल मिलेगा, जिसमें उन्हें कार्रवाई पूरा करने का तरीका दिखाया जाएगा। बढ़त मापने का मीटर और सिखाने वाले वीडियो ने माइक्रो लक्ष्य पाने का प्रतिशत 7% से 26% तक बढ़ा दिया – यह ऐसी सफलता है, जो Ghost के सदस्य बनाने वाले मैक्रो लक्ष्य तक “पहुंचाएगा”। आप YouTube और सोशल मीडिया पर किराए पर लिए जाने वाले चैनलों पर भी ये लक्ष्य ट्रैक कर सकते हैं। यहां मैक्रो और माइक्रो लक्ष्य थोड़े अलग होते हैं, क्योंकि आप मुख्य रूप से अपनी सामग्री की क्वालिटी जाँच रहे होंगे। आप इस आधार पर अलग-अलग मेट्रिक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं कि आप किस चैनल पर हैं।


YouTube के लिए, आप मैक्रो लक्ष्य के रूप में बढ़तन और माइक्रो लक्ष्य के रूप में सदस्यताएं ट्रैक कर सकते हैं। बढ़त या यह ट्रैक करना कि ढेर सारे दर्शकों के बीच आपकी सामग्री कितनी मशहूर हो रही है, यह दिखाता है कि कितने लोग आपके YouTube वीडियो से जुड़ते हैं, उसे एम्बेड करते हैं या शेयर करते हैं। यह इसका अच्छा संकेत है कि यह कितना लोकप्रिय या असरदार है। सदस्यताओं को ट्रैक करना आपको दिखाता है कि आप अपने प्रशंसकों को कितना आकर्षित करते हैं। ये वही लोग हैं, जो आपके पोस्ट करते ही आपकी सामग्री देखना चाहते हैं और ये वही लोग होंगे, जो उसकी चर्चा करेंगे और उसे आगे बढ़ाएंगे – जो कि, बेशक, बढ़त के आपके मैक्रो लक्ष्य में मदद करेगा।


स्ट्रीम करने वाली सोशल मीडिया साइट के लिए, जहां स्टेटस अपडेट या ट्वीट जैसे पोस्ट फ़ीड में जल्दी-जल्दी बदलते रहते हैं, आप ककन्वर्ज़न दर आपके कारोबार से जुड़े मैक्रो असर की मेट्रिक है. यह आपके निजी पोस्ट पर टिप्पणियों की संख्या है और आपको बता सकती है कि आपको अपने दर्शक मिल रहे हैं या नहीं, आप अच्छी सामग्री शेयर कर रहे हैं या नहीं, दर्शकों से जुड़ने के लिए सही तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं और ऑनलाइन समुदाय बना रहे हैं या नहीं। कनवर्जन दर और ब्रैंड के बारे में जागरूकता को ट्रैक कर सकते हैं। कन्वर्ज़न दर आपके कारोबार से जुड़े मैक्रो असर की मेट्रिक है. यह आपके निजी पोस्ट पर टिप्पणियों की संख्या है और आपको बता सकती है कि आपको अपने दर्शक मिल रहे हैं या नहीं, आप अच्छी सामग्री शेयर कर रहे हैं या नहीं, दर्शकों से जुड़ने के लिए सही तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं और ऑनलाइन समुदाय बना रहे हैं या नहीं।


सोशल मीडिया पर माइक्रो असर आपको बताएंगे कि लंबे समय में आपकी पोस्ट ब्रैंड के बारे में कितनी जागरूकता फैला रही है। इस तरह के लक्ष्यों में आपके चैनल और दर्शक के बीच सही तरह से किए गए लगभग सभी इंटरैक्शनशामिल हो सकते हैं – जैसे आपके पोस्ट किए गए लिंक पर क्लिक-थ्रू दर, आपको फ़ॉलो करने वाले नए लोग या आपकी साइट पर वापस आने वाले लोगों की संख्या। पक्का करें कि आप चैनल के लक्ष्यों से जुड़ी कम से कम एक मेट्रिक के साथ तैयार हैं।




मेट्रिक (और हिसाब) देखकर पता लगाएं कि आपकी साइट पर SEM कैसा काम कर रहा है।
आपने अपने कीवर्ड चुन लिए हैं, आकर्षक ऑनलाइन विज्ञापन बना लिए हैं...अब समय आ गया है कि आप सर्च इंजन मार्केटिंग (SEM) की सफलता का फ़ायदा उठाएं, या अभी भी कुछ करना बाकी है? आपको अपने SEM कैंपेन से ग्राहक मिल रहे हैं या नहीं और आपकी कमाई में बढ़त हुई है या नहीं, यह पता लगाने के लिए आपको एक लक्ष्य तय करके ज़रूरी मेट्रिक के ज़रिएउसे ट्रैक करना होगा। आपका लक्ष्य आपके कारोबार की ज़रूरतों पर निर्भर करता है, लेकिन लीड बनाना, खरीदारी बढ़ाना, और ब्रैंडके बारे में जागरूकता फैलाना, ये तीन लक्ष्य आम तौर से सभी कारोबारों के होते हैं। आप इनके बारे में जानते होंगे, लेकिन आइए एक बार फिर इन्हें समझने की कोशिश करते हैं।


हो सकता है कि आप ये तीनों SEM लक्ष्य पाना चाहते हों, लेकिन आपको एक मुख्य लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए और उसे ट्रैक करने के लिए एक प्रमुख मेट्रिक का इस्तेमाल करना चाहिए। लीड बनाने के लिए आपको ‘हर लीड पर आने वाली लागत’ (CPL) पर नज़र रखनी चाहिए। खरीदारी को ‘विज्ञापन खर्च पर होने वाले फ़ायदे’ (ROS) से मापा जा सकता है। ब्रैंड जागरूकता मापने के लिए कोई एक सटीक मेट्रिक नहीं है, लेकिन आप पहुंच, दोहराए जाने की दर (फ़्रीक्वेंसी) या असर को ट्रैक कर सकते हैं। हम पहुंच पर ध्यान देंगे, इसे मापने के लिए आपके SEM विज्ञापनों पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आने वाले नए (यूनीक) लोगों की संख्या ट्रैक करनी होगी। लीड और खरीदारी को मापने के लिए उनके कुछ हिसाब फ़ॉर्मूला हैं। (हमें पता है कि यह सुनने में काफ़ी मज़ेदार लगता है।) डरने वाली कोई बात नहीं है...हम आपको इन सबका हिसाब-किताब करना सिखाएंगे।

आइए, लीड बनाने और उसके मेट्रिक CPL से शुरू करते हैं। मान लें कि कबीर अपनी कैरीओके साइट पर आने वाले लोगों से एक ऑनलाइन फ़ॉर्म भरवा कर लीड बनाना चाहते हैं। उनके SEM कैंपेन ने इस लक्ष्य को कितने बेहतर तरीके से पूरा किया, इसे वह पता कर सकते हैं, कैसे आइए जानते हैं, विज्ञापनों पर खर्च होने वाली रकम ÷ लीड की संख्या = CPL। अब इन संख्याओं को प्लग इन करें: कबीर ने अपने SEM कैंपेन पर ₹5,000 खर्च किए। उनके विज्ञापनों को लोगों ने 10,000 बार देखा। उनमें से 500 लोगों ने उनके विज्ञापनों पर क्लिक किया और उसकी वेबसाइट पर गए। उन 500 लोगों में से 50 ने पूछताछ फ़ॉर्म भरा (या यूं कहें कि लीड बनें)। इस जानकारी के साथ CPL मापने का फ़ॉर्मूला कुछ इस तरह से होगा: ₹5,000 (विज्ञापनों पर खर्च होने वाली रकम) ÷ 50 (लीड की संख्या) = ₹100 (CPL)।

कबीर ने पहले से तय कर लिया था कि एक लीड उन्हें लगभग ₹150 की पड़ेगी. ₹100 पर, उनका CPL उससे कम ही है. इसलिए वह जानते हैं कि उन्होंने SEM कैंपेन पर जो निवेश किया, उससे उन्हें फ़ायदा हुआ। इसी फ़ॉर्मूले से कबीर यह पता लगा सकते हैं कि उनके हर SEM कीवर्ड के लिए CPL कितना है। फिर वह अपने उन CPL पर खर्च बढ़ा देंगे, जो ₹150 की लीड कीमत से कम या उसके बराबर हैं. इससे उन्हें ज़्यादा लीड बनाने में मदद मिलेगी। आइए, अब बतौर लक्ष्य, ख़रीदारी बढ़ाने और ROS ट्रैक करने के बारे में जानें। धीरज ऑनलाइन बिकने वाली डिज़ाइनर टी-शर्ट की संख्या बढाकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं। अपनी SEM सफलता मापने के लिए धीरज इस फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल करते हैं: आय ÷ विज्ञापनों पर खर्च होने वाली राशि x 100 = ROS %। इस फ़ॉर्मूला के लिए यह मान इस्तेमाल होंगे: उन्होंने अपने SEM कैंपेन पर ₹1,000 खर्च किए और उनके विज्ञापनों को लोगों ने 5,000 बार देखा। 100 लोगों ने उनके विज्ञापन पर क्लिक किया और उनकी साइट पर गए। इनमें से 20 लोगों ने डिज़ाइनर टी-शर्ट खरीदी। उनकी बिक्री से उन्हें कुल ₹1,600 की कमाई हुई।

ROS निकालने के लिए उनका फ़ॉर्मूला होगा: ₹1,600 (आय) ÷ ₹1,000 (विज्ञापनों पर खर्च होने वाली रकम) x 100 = 160% (ROS %) – जो कि एक बहुत अच्छा प्रतिशत है। कबीर की तरह धीरज भी अपने हर कीवर्ड को मापने के लिए अपने फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल कर सकते हैं। वह ज़्यादाROS) प्रतिशत वाले कीवर्ड पर ज़्यादा और कम (ROS) प्रतिशत वाले कीवर्ड पर कम खर्च कर सकते हैं। आखिर में, आइए ब्रैंड जागरूकता पर नज़र डालते हैं और आपके SEM कैंपेन पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आने वाले नए (यूनीक) लोगों की संख्या देखते हैं। 

आरती चाहती हैं कि उनकी वेबसाइट पर आने वाले लोगों की संख्या बढ़े, ताकि लोग उनकी आर्ट गैलरी के बारे में जानें। कबीर और धीरज से अलग, वह मुश्किल फ़ॉर्मूलों को छोड़कर अपनी सफलता मापने के लिए Google Analytics या Adobe Analytics जैसे टूल का इस्तेमाल कर सकती हैं। उन टूल से आरती यह जान सकती हैं कि सिर्फ़ उनके SEM कैंपेन से उनकी साइट पर कितने लोग पहली बार आए। वह खास कीवर्ड के लिए क्लिक-थ्रू दर भी देख सकती हैं। इससे उन्हें यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कौनसे कीवर्ड लोगों को उनकी साइट पर लाने और ब्रैंड जागरूकता बढ़ाने में बेहतर साबित हो रहे हैं। इससे वह जान पाएंगी कि किन कीवर्ड पर बोली लगाने से उन्हें फ़ायदा होगा। चूंकि अब आप तीन सामान्य SEM लक्ष्यों के लिए मेट्रिक ट्रैक करने का तरीका देख चुके हैं, तो आइए पता लगाते हैं कि आपके कारोबार के लिए कौनसा लक्ष्य सबसे फायदेमंद हो सकता है। 




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देखना-सोचना-करना यानिकि हर तरह के ग्राहक की ज़रूरत (इंटेंट) को समझना और क्या मेरी पूरी मार्केटिंग का ध्यान कन्वर्ज़न (ग्राहक में बदलने) और बिक्री पर ही होना चाहिए? ग्राहकों की तीन तरह की ज़रूरतें (इंटेंट) क्या-क्या हैं? मैं हर तरह की ज़रूरत (इंटेंट) के हिसाब से अपनी मार्केटिंग किस तरह ऑप्टिमाइज़ करूं? इशान को एक परेशानी आ रही है। वह अपनी जींस को लेकर नाखुश हैं। (हमने कभी यह दावा नहीं किया कि यह एक बड़ी परेशानी है।) इशान को पूरी तरह नहीं पता कि उन्हें अपनी मौजूदा जींस क्यों पसंद नहीं हैं – हो सकता है वह बहुत तंग हो, बहुत चौड़ी हो, बहुत ही फ़ॉर्मल हो या बहुत ही कैजुअल हो? कम शब्दों में कहें, तो वह अभी नई जींस खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं।।।लेकिन कुछ विकल्प ज़रूर देखना चाहते हैं। एक दिन इशान को एक स्टाइल ब्लॉग पढ़ते हुए जींस का विज्ञापन दिखाई देता है जिसे देखकर वह उसकी रीटेल वेबसाइट देखने का मन बना लेते हैं। चलिए, हम अंदाज़ा लगाते हैं कि किस तरह का विज्ञापन किसी ऐसे व्यक्ति को लुभा सकता है जिसे अभी खरीदारी नहीं करनी है। इशान की तरह, हर ग्राहक खरीदारी के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, आपकी मार्...

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व्यापारिक रणनीति: एक व्यावसायिक रणनीति उन कार्यों और निर्णयों को संदर्भित करती है जो एक कंपनी अपने व्यावसायिक लक्ष्यों तक पहुंचने और अपने उद्योग में प्रतिस्पर्धी होने के लिए लेती है। यह परिभाषित करता है कि अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए व्यवसाय को क्या करने की आवश्यकता है, जो भर्ती और संसाधन आवंटन के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को निर्देशित करने में मदद कर सकता है। एक व्यावसायिक रणनीति विभिन्न विभागों को एक साथ काम करने में मदद करती है, जिससे विभागीय निर्णय कंपनी की समग्र दिशा का समर्थन करते हैं। एक व्यापार रणनीति क्यों महत्वपूर्ण है? संगठनों के लिए एक व्यावसायिक रणनीति क्यों महत्वपूर्ण है, इसके कई कारण हैं, जिनमें शामिल हैं: नियोजन : एक व्यावसायिक रणनीति आपको अपने व्यावसायिक लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण कदमों की पहचान करने में मदद करती है।  ताकत और कमजोरियां: एक व्यावसायिक रणनीति बनाने की प्रक्रिया आपको अपनी कंपनी की ताकत और कमजोरियों की पहचान करने और मूल्यांकन करने की अनुमति देती है, एक ऐसी रणनीति का निर्माण करती है जो आपकी ताकत को भुनाने और आपकी कमजोरियों को दूर कर...